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प्रतीकात्मक तस्वीर
Maharajganj kabhar live
लखनऊ। यूपी के गोरखपुर मंडल अंतर्गत एक जिले के एक ब्लाक में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा कुकर और कड़ाही की चर्चा बनी हुई है। बताया जा रहा है, कि एक कार्यक्रम में रखे गए ये बर्तन अचानक काफी दूर पहुंच गए। ऐसे में लोगों ने पहले सोचा कि शायद बर्तन भी आत्मनिर्भर भारत की राह पर चल पड़े हैं। लेकिन बाद में पता चला कि यह आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि कुछ जिम्मेदारों की निर्भरता का कमाल था।
माना जा रहा है कि यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। क्योंकि जो कुकर-कड़ाही एक ब्लाक में रखे हुए थे। वे प्रशासनिक सीमाओं की बगैर परवाह किए बिना ही लंबी दूरी तय कर चार ब्लाक दूर जा पहुंचे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ब्लॉकों का विकास कार्य भले ही सीमाओं तक सीमित है। लेकिन इन बर्तनों की गतिशीलता काबिले तारीफ निकली है।
इसी बीच इन बर्तनों की लंबी दूरी तय करने की भनक विभाग के बड़े जिम्मेदारों तक जा पहुंची। उसके बाद जहां पहले खामोशी थी, वहां अब अचानक हलचल तेज होने लगी। इतना ही नहीं जो जिम्मेदार सवालों पर कुछ नहीं होने का जवाब देते फिर रहे थे, वह अचानक सब कुछ जल्द ठीक कर देने की हवाला देने लगे।
सूत्र बताते है कि जिम्मेदार इज्जत को बचाने के लिए मामले में कोई लिखापढ़ी करना उचित नहीं समझे। हालांकि दबाव इतना गंभीर होने लगा कि गायब बर्तन अपने उक्त जगह पहुंचने के लिए रवाना हो गए। लाजिमी भी था, क्योंकि कार्रवाई से बचने और मामले को जल्द ठंडा करना था। फिलहाल, कुकर और कड़ाही अपने मूल स्थान की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में विभाग के सिस्टम ने एक बार फिर साबित कर दिया है, कि यहां चीजें गायब भी होती है। करतूत उजागर होने पर प्रकट भी हो जाती है। बस थोड़ा विभागीय अधिकारियों का दबाव होना चाहिए।


