महराजगंज में सीधी बुवाई से धान की बंपर पैदावार, प्रति हेक्टेयर 95.70 क्विंटल उपज

देश राज्य

Loading

क्रॉप कटिंग कराते कॄषि वैज्ञानिक
Maharajganj khabar live
महराजगंज। धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक से खेती करने पर लागत में कमी के साथ बेहतर उत्पादन भी हासिल किया जा सकता है। चौक बाजार स्थित चौक छावनी में इसका उदाहरण देखने को मिला, जहां सीड्रिल मशीन से बोई गई धान की फसल का उत्पादन 95.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र पीपीगंज और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई), वाराणसी की संयुक्त टीम ने फसल की कटाई और मड़ाई का निरीक्षण किया।
उप कृषि निदेशक संजीव कुमार के निर्देशन में पहुंची टीम ने 10 जून 2026 को सीड्रिल मशीन से सीधी बुवाई कर तैयार की गई फसल की कटाई और थ्रेसिंग का जायजा लिया। इसके लिए 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फसल की कटाई कर धान का शुद्ध वजन किया गया। इसके आधार पर प्रति हेक्टेयर 95.70 क्विंटल उत्पादन का आकलन किया गया। उप कृषि निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि कृषि विभाग और आईआरआरआई की ओर से प्रोत्साहित की जा रही धान की सीधी बुवाई तकनीक को किसानों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। इस वर्ष बड़ी संख्या में किसानों ने इसे अपनाया है। इस विधि से पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी और श्रम की बचत होती है, जिससे खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उत्कृष्ट धान उत्पादन के लिए किसान सम्मान प्राप्त हो चुका है।आईआरआरआई, वाराणसी के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय पुंडीर ने कहा कि धान की सीधी बुवाई किसानों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। पारंपरिक रोपाई की तुलना में इस विधि से फसल आठ से दस दिन पहले पककर तैयार हो जाती है। इससे किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त समय मिलता है और अगली रबी फसल की बुवाई भी समय से की जा सकती है।
इस दौरान आईआरआरआई के वैज्ञानिक डॉ. देव नारायण, कृषि विज्ञान केंद्र पीपीगंज के फसल विशेषज्ञ अवनीश कुमार सिंह, मिठौरा ब्लॉक के कृषि सहायक विवेक शर्मा, लेखपाल सुनील कुमार सहित किसान अभिमन्यु वर्मा, सुमित सिंह, धर्मवीर और अन्य किसान मौजूद रहे।