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जंगल में विचरण करते हिरण
Maharajganj kabhar live
महराजगंज। वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल वन रेंज में बेहतर कार्य योजना तैयार की गई है। यही कारण है कि वन क्षेत्र के जंगलों में लगातार वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। वन क्षेत्र की हरियाली वाले इस जंगल की झाड़ियां व नारायणी नदी का दलदली भूभाग इन्हें खूब लुभा रहा है। इतना ही नहीं वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर वनकर्मी भी लगातार पेट्रोलिंग के जरिए निगरानी कर रहे हैं। इस वन क्षेत्र में बंदर, तेंदुआ सहित अन्य जानवरों के अलावा हिरण की काफी अच्छी संख्या भी पाई जाती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में करीब 250 हिरणों की संख्या वन क्षेत्र में है।
जानकारी के मुताबिक सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत नारायणी नदी के किनारे पर बसा निचलौल वन रेंज का आबोहवा वन्यजीवों को काफी रास आ रही है। वन कर्मियों की लगातार पेट्रोलिंग के चलते वन्यजीव खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लगातार हिरन और तेदुओं की बढ़ती संख्या इसका उदाहरण है। आंकड़ों के मुताबिक वन रेंज क्षेत्र में हिरणों की संख्या लगभग 250 पहुंच गई है। इसी तरह तेंदुए सहित अन्य जानवरों की संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। वन वही विभाग के अधिकारियों का मानना है, कि अनुकूल परिस्थियों के चलते ही ये संभव हुआ है। न सिर्फ हिरण बल्कि अन्य वन्यजीव भी बढ़ रहे हैं। अब वन क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान लगातार वन्यजीवों को चहलकदमी करते देखा जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वन रेंज का कुल क्षेत्रफल 6823.10 हेक्टेयर है। जो उत्तरी, दक्षिणी, डोमा, गंडक, कलनहीं, चरगहा, सिसवा और निचलौल बीट में बंटा है। इन वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वन्यजीवों के लिए उत्तरी, दक्षिणी, डोमा और निचलौल बीट के घने जंगलों के बीच वाटर टैंक भी बनाया गया है। इस रेंज में गुदगुड़िया ताल, चंदमणि ताल, झवई ताल, मंझरिया ताल, दर्जिनिया ताल जैसी कई आर्द्रभूमियां हैं। इतना ही नहीं यहां पर छोटी गंडक नदी भी है। रेंज में डोमा और निचलौल में दो वन विश्राम गृह भी हैं।सर्दियों के दौरान यहां वेस्टर्न ऑस्प्रे, लॉन्ग-लेग्ड बज़र्ड, ओरिएंटल हनी-बज़र्ड जैसे शिकारी पक्षी भी देखे जाते है।
वही इस संबंध में निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि वन विभाग की ओर से वन रेंज क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के कारण ही वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है। विभाग के कर्मचारी गंभीरता से जंगलों की सुरक्षा में डटे हुए है। इसे और बेहतर करने के प्रयास जारी हैं।
लगातार पेट्रोलिंग से सुरक्षित हुए जंगल
निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल वन रेंज वन्यजीवों के लिए काफी बेहतर है। वन कर्मियों की लगातार पेट्रोलिंग से जंगल काफी सुरक्षित हुए हैं। इसका प्रभाव वन्यजीवों की संख्या पर भी पड़ रहा है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षों से वन्यजीवों की संख्या लगातार बढी है। यह जंगलों के आबाद होने का संकेत है। ऐसे में जंगल में हिरन, बंदर के साथ पर्यटकों को तेदुएं को देखने का भी अलग ही रोमांच होगा। जंगल समृद्धि की ओर हैं।


