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रिपोर्ट, धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता
महराजगंज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉस्को एक्ट के तहत 20 साल की सजा पाए अभियुक्त को अपील लंबित रहने के दौरान जमानत दे दी है। कोर्ट ने अभियुक्त और पीड़िता के बीच हुए समझौते, दोनों के पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की सहमति, अभियुक्त के जेल में बिताए समय और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।
दरअसल यह पूरा मामला महराजगंज जिले के चौक थाना क्षेत्र का है। स्पेशल सेशंस ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त शैलेश गुप्ता उर्फ शिवा को दुष्कर्म और पॉस्को अधिनियम की धारा 5(जे)(2) के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अभियुक्त ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की और सजा पर रोक के साथ जमानत की मांग की।
वही सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता अदील अहमद खान ने दलील दी कि अभियुक्त और पीड़िता के बीच विवाद का समाधान हो चुका है। दोनों ने आपस में समझौता कर लिया है और पति-पत्नी के रूप में साथ रहने के लिए सहमत हैं।
अदालत को बताया गया कि इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को समझौता हलफनामा भी दाखिल किया गया है। अभियुक्त की ओर से यह भी कहा गया कि उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है। वह करीब 3 वर्ष 4 महीने से जेल में बंद है। हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में अपील लंबित होने के कारण अपील की जल्द सुनवाई की संभावना नहीं होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई।
राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध
वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध किया। राज्य की ओर से दलील दी गई कि अभियुक्त पर गंभीर अपराध में दोषसिद्धि हुई है और मुकदमे के दौरान गवाहों ने अभियोजन के मामले का समर्थन किया था। ऐसे में अभियुक्त को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने दी जमानत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की पीठ ने मामले में उपलब्ध सामग्री और परिस्थितियों पर विचार किया। कोर्ट ने मुकदमे की लंबित स्थिति, अभियुक्त के जेल में बिताए समय तथा अभियुक्त और पीड़िता के बीच हुए समझौते और पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की सहमति को भी ध्यान में रखा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने शैलेश गुप्ता उर्फ शिवा को अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि अभियुक्त से व्यक्तिगत बंधपत्र और दो प्रतिभूतियां प्राप्त करने के बाद उसकी जमानत स्वीकार की जाए।


