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Maharajganj kabhar live
निचलौल। गेहूं खरीद के लिए क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी से निपटने के लिए अधिकारियों ने कोटेदारों से राशन वितरण के बाद बोरा सरेंडर करने के लिए कहा गया था। कोटेदारों से बोरे लेने के बाद 30 रुपए प्रति बोरा का भुगतान शासन स्तर से किया जाएगा। लेकिन कोटेदारों ने अधिकारियों के इस फरमान को दरकिनार कर दिया है। यही कारण है कि 21000 के सापेक्ष अभी तक महज 4500 बोरे जमा किया गया है। ऐसे में विभाग बोरे न जमा करने वाले कोटेदारों की सूची तैयार कर जल्द सख्त कार्रवाई करने के लिए योजना बना रही है।
जानकारी के मुताबिक ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से बोरे का संकट होने के कारण पी-फॉर्म प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से प्लास्टिक सामग्री बनाने की लागत बढ़ गई है। प्लास्टिक के बोरे नहीं मिलने से दूसरे विकल्प के रूप में तलाश की गई है। बोरे की पहली बार किल्लत होने के बाद कोटेदारों से बोरे लेकर जूट के बोरे में गेहूं की खरीद की जा रही है। पूर्ति निरीक्षक इंद्रभान सिंह ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीद कार्य तेजी से चल रहा है। केंद्रों पर बोरे की कमी दूर करने के लिए विभाग ने मार्च महीने से ही कोटेदारों से सीधे बोरा खरीदने का निर्णय लिया है। ताकि क्रय केंद्रों पर समय से पर्याप्त बोरे उपलब्ध होने के साथ ही खरीद प्रक्रिया बाधित न रहे। लेकिन अधिकांश कोटेदारों की ओर से राशन वितरण करने के बाद भी अब तक बोरे नहीं जमा किए गए है। हालांकि निचलौल ब्लॉक क्षेत्र में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में कुछ 115 कोटे की दुकान संचालित हो रही है। इन कोटे के दुकान कर 21000 बोरे भेजे गए थे। लेकिन करीब 70 कोटेदारों ने बोरे जमा करने की खानापूर्ति करते हुए 4500 बोरा ही जमा किया है। हालांकि कोटेदारों से बोरे लेने के बदले उन्हें शासन स्तर से 30 रुपए प्रति बोरा दिए जाएंगे। ऐसे में बोरा न जमा करने वाले कोटेदारों की सूची तैयार हो चुकी है। जल्द ही ऐसे कोटेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


