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निचलौल ब्लॉक के गांवों में बने बदहाल आरआरसी भवन
निचलौल। ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में कूड़ा निस्तारण के लिए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) भवन बनाये गए है। जो शुरू होने से पहले ही अधिकांश भवनों की दीवारें और फर्स चटकने लगी है। भवन के टैंक भी अधूरे छोड़ दिए गए है। पानी की पाइप लाइन और बिजली के कार्य भी अधूरे पड़े है। कई जगहों कर तो भवनों तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। हालांकि जिम्मेदार विभागीय फाइलों को दुरुस्त कर अपनी करतूतों पर पर्दा डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़े है।
ग्रामीणों ने निर्माण आरआरसी भवनों में दोयम दर्जे की सामाग्री लगाने का आरोप लगाते हुए गुणवत्ता की जांच करने की मांग की है। सिधावे गांव में निचलौल चिउटहा मार्ग के किनारे बने आरआरसी भवन के पास मौजूद सरस्वती देवी ने बताया कि सेंटर का निर्माण करीब एक साल पहले हुआ था। निर्माण पूरा होने के बाद से ग्रामीणों को आस थी, कि इस सेंटर का उद्घाटन होगा और वह इसका उपयोग कर सकेंगे। लेकिन उद्घाटन से पहले ही भवन की दीवारें दरकने के साथ ही फर्स चटक चुकी है।
इसी तरह विशुनपुरा गांव में बने आरआरसी भवन की रंगाई पुताई कर चकाचौंध कर दिया गया है। जबकि इसके टैंक को अधूरा छोड़ दिया गया है। ऐसा ही कुछ नजारा गांव हरगांव में बने आरआरसी भवन की गया। क्योंकि इसे भी जिम्मेदार बनाकर रंगाई पुताई करने के बाद टैंक को अधूरा छोड़ दिया है। इतना ही अंदर परिसर में दीवार में कई जगहों पर दरार आ चुकी है। शौचालय सीट को भी अधूरा छोड़ दिया गया है। सबसे दयनीय स्थित तो गांव कटका में बने आरआरसी भवन को देखने में मिली। यहां पर तो जिम्मेदार भवन निर्माण की महज खानापूर्ति किए है। क्योंकि भवन के दीवारों में कई जगहों पर मोटी दरार आने के साथ ही फर्स पूरी तरह से चटक चुकी है। इतना ही नहीं भवन की रंगाई पुताई कराना तो दूर की बात है। जिम्मेदार भवन में बिजली और पानी की पाइप लाइन भी लगाना भूल गए है। ग्रामीणों ने सेंटर के निर्माण में जिम्मेदारों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। तस्वीरें से पता चल रहा है कि निर्माण के समय इसमें जमकर गड़बड़ी की गई है। गांव कलनही खुर्द में बने आरआरसी भवन तक तो जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। क्योंकि जिम्मेदार भवन का निर्माण कराने के बाद आगे गेट पर गड्ढे ही छोड़ दिया है। वही गांव ख़म्हौरा में बने आरआरसी भवन की गुणवत्ता का पोल चटकी फर्स खोल रही है। भवन के अंदर की कार्यों को अधूरा छोड़ दिया गया है। चटकी फर्स पर घास निकल चुके है।
वही भारत नेपाल बार्डर से सटे शीतलापुर खेसरहा गांव में बने आरआरसी भवन की स्थित तो काफी बदतर हो चुकी है। क्योंकि भवन निर्माण में जिम्मेदारों की ओर से काफी धांधली की गई है। भवन में दीवार दरकने के साथ ही फर्स पूरी तरह से चटक चुकी है। मुख्य दरवाजा भी टूट चुका है। बिजली और पानी की पाइप लाइन भी उखड़ने के साथ ही टैंट धंस चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि आरआरसी भवनों के निर्माण में जिम्मेदारों की ओर से काफी धांधली कर रकम का बंदरबांट किया गया है। निर्माण के समय उपयोग होने वाला सामाग्री दोयम दर्जे का लगाया गया। यही कारण है कि दीवार में दरार पड़ने के साथ फर्स चटक चुकी है।
जांच कर होगी कार्रवाई
डीपीआरओ श्रेया मिश्रा ने बताया कि आरआरसी सेंटर की दीवारों में दरार आना और फर्स चटकना गलत है। किस कारण से दीवार में दरार और फर्स चटकी हैं, उसकी जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
फाइलों में दुरुस्त, जमीनी हकीकत में खुली पोल
विभागीय फाइलों के मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र के कुल 108 गांवों में से 104 गांवों में आरआरसी भवनों को बनाकर तैयार कर दी गई है। जबकि महज 4 गांवों में जमीन नहीं उपलब्ध होने के चलते भवन का निर्माण नहीं हो सका है। फाइलों में भवन का निर्माण बेहतर गुणवत्ता के साथ किया गया है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहे है। गांव अमडी और रामचन्द्रही में आरआरसी भवन का निर्माण जिम्मेदार नींव तक ही कराने के बाद भूल चुके है। ऐसे में जो निर्माण कराया गया है। वही भी दोयम दर्जे की सामाग्री का प्रयोग होने के चलते बदहाल हो चुका है।


