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Mahrajganj khabar live
महराजगंज। सड़कों का चौड़ा नेटवर्क और तेज रफ्तार सफर भले ही मंजिलों की दूरी कम कर दे, लेकिन कभी-कभी यही रफ्तार जिंदगी की डोर हमेशा के लिए तोड़ देती है। ग्रेटर नोएडा के जेवर कोतवाली क्षेत्र में बीते रविवार देर रात यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने महराजगंज के दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल गई। क्रैश बीम बैरियर तोड़कर एक तेज रफ्तार ट्राला कार पर जा पलटा। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। इनमें महराजगंज के सवरेजी गांव निवासी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रितेश पांडेय (50), उनके बेटे अभिसार पांडेय और जयप्रकाशनगर निवासी इंजीनियर विकास कश्यप (30) शामिल हैं।
हादसे की खबर सोमवार सुबह जैसे ही महराजगंज पहुंची, सरोजनी और जयप्रकाश नगर में मातम छा गया। घरों में चीख-पुकार मच गई। परिजनों और ग्रामीणों को इस हृदयविदारक घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है।
अमेरिका से 16 अगस्त को आया था अभिसार, पिता के साथ गांव भी आया
सदर कोतवाली क्षेत्र के सवरेजी गांव निवासी रितेश पांडेय वर्ष 2004 से दिल्ली के नजफगढ़ में रह रहे थे। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनका बड़ा बेटा अभिसार पांडेय अमेरिका में इंजीनियर था।
परिजनों के अनुसार अभिसार 16 अगस्त को ही अमेरिका से दिल्ली आया था। पिता-पुत्र के बीच बेहद गहरा लगाव था। इसी दौरान दोनों गांव सवरेजी भी पहुंचे और बुजुर्गों व रिश्तेदारों से मुलाकात की। गांव से दिल्ली लौटते समय यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने पिता-पुत्र दोनों की जिंदगी छीन ली।
बेटे-पोते के शव का इंतजार कर रहे बुजुर्ग पिता
रितेश पांडेय के वृद्ध पिता जितेंद्र पांडेय पैरालाइसिस से पीड़ित हैं। जिस बेटे और पोते के लौटने का इंतजार था, अब उनके शव घर पहुंचने की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया है। रितेश के परिवार में अब उनका छोटा बेटा आयुष ही है, जो दिल्ली में रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा है। गांव में जिसने भी पिता-पुत्र की मौत की खबर सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि रितेश और अभिसार के बीच पिता-पुत्र से बढ़कर दोस्त जैसा रिश्ता था। दोनों का इस तरह एक साथ चले जाना पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।
पांच साल पहले शुरू हुआ था विकास का वैवाहिक जीवन, अब दो मासूमों के सिर से उठा साया
हादसे में महराजगंज के जयप्रकाशनगर निवासी 30 वर्षीय विकास कश्यप की भी मौत हो गई। दिल्ली की एक निजी कंपनी में इंजीनियर विकास अपने परिवार की बेहतर जिंदगी और उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।
करीब पांच साल पहले ही उनका विवाह मोहिनी के साथ हुआ था। उनके दो छोटे बच्चे हैं। पिता की मौत से अनजान इन मासूमों को अभी शायद यह भी नहीं मालूम कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। विकास के पिता सत्यप्रकाश भी लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। हादसे की खबर मिलते ही पत्नी मोहिनी बदहवास हो गईं। बहनों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बैरियर तोड़कर कार पर पलटा ट्राला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
रविवार देर रात यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा इतना भीषण था कि तेज रफ्तार ट्राला एक्सप्रेसवे के क्रैश बीम बैरियर को तोड़ते हुए कार पर जा पलटा। कार में सवार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और तेज रफ्तार वाहनों पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सुरक्षा बैरियर को वाहनों को दुर्घटना से बचाने के लिए लगाया गया था, उसे तोड़कर ट्राला कार पर जा गिरा।
दो गांवों में नहीं जले चूल्हे, दिल्ली रवाना हुए परिजन सोमवार सुबह हादसे की खबर सरोजनी और जयप्रकाश नगर पहुंची तो दोनों गांवों में सन्नाटा पसर गया। घरों में चूल्हे तक नहीं जले। हर तरफ रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई देती रहीं।
चचेरे भाई देवेंद्र दत्त पांडेय के नेतृत्व में परिजन शवों को दिल्ली से महराजगंज लाने के लिए रवाना हो चुके हैं। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा है।


